'च्युइंग गम' का अविष्कार कैसे हुआ

'च्युइंग गम' का अविष्कार कैसे हुआ

दोस्तों च्युइंग गम तो आप सभी ने खाई होगी लेकिन क्या आपको पता है कि च्युइंग गम का आविष्कार किसने और कैसे किया तो आज हम आपको बताएँगे कि च्युइंग गम के आविष्कार के पीछे की कहानी क्या थी 


'च्युइंग गम' का अविष्कार कैसे हुआ
'च्युइंग गम' का अविष्कार कैसे हुआ


21 वर्षीय जॉन भी कर्टिस को अंततः काम मिल ही गया था इस उत्साही नौजवान का कार्य था राह में उगी झाड़ियों को काटकर सफाई करना अपने इस काम के दौरान उसने अपने अन्य साथी बन वालों की तरह स्फुस नामक पेड़ो से गिरने वाले रस जिसे सेप या गम कहा जाता जिसे चबाना शुरू कर दिया था 

स्फुस नामक पेड़ो से गिरने वाला यह पदार्थ चबाने में अच्छा तो लगता था परंतु उसमें केवल एक ख़राबी थी यह गम शीघ्र ही अपनी लोज खो देता था और ऐसे में उसे चबाने का आनंद भी खत्म हो जाता था जॉन ने इस गम को ज्यादा देर तक लचीला बनाए रखने के लिए अपनी मां के स्टोर पर पकाने शुरू कर दिया अपने प्रयोग की सफलता से उत्साहित हुए जॉन ने अपने अगले कदम में इस गम में विभिन्न तरह के स्वादों का मिश्रण मिलाने का कार्य शुरू कर दिया 

जॉन के दोनों प्रयोग सफल रहे उसके द्वारा बनाया गया गम न सिर्फ अधिक देर तक ही टिकता था बल्कि वह विभिन्न स्वादों एवं खुश्बू वाला भी था अब जॉन ने अपने बनाए इस गम को बेचने का मन बनाया और झाड़ियों को काटने के काम को छोड़ दिया और अब उसने अपना पूरा ध्यान एवं शक्ति स्टेट ऑफ मैन पर केंद्रित कर दिया उसके द्वारा बनाया गया यह गम छोटी-छोटी जड़ों के रूप में होता था जो मोम लगे काग़ज़ में लिपटी होती थी

उनके उत्पाद को ख्याति मिल गई पहले जहा काटने वाले काम से जॉन को प्रति सप्ताह $5 की आय होती थी वहीं अब जॉन हजारों डॉलर कमाने लगा था अपने आश्चर्यजनक उत्पाद से अपने व्यवसाय के पहले ही वर्ष में कुल $5000 शुद्ध लाभ के रूप में अर्जित किया और इस तरह चिंगम पूरे विश्व में मशहूर हो गई

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