जानिए इलाहाबाद का नाम प्रयागराज क्यों किया गया

इलाहाबाद उत्तर प्रदेश के प्रमुख धार्मिक नगरों में से एक है यह नगर किसे प्राचीन समय में प्रयाग नाम से जाना जाता था अपनी संपन्नता वैभव और धार्मिक गतिविधियों के लिए जाना जाता रहा है भारतीय इतिहास में इस नगर में युगों के परिवर्तन देखे हैं और साथ ही बदलते हुए इतिहास के उत्थान पतन को देखा है 

जानिए इलाहाबाद का नाम प्रयागराज क्यों किया गया
जानिए इलाहाबाद का नाम प्रयागराज क्यों किया गया


जहां एक तरफ यह नगर राष्ट्र की सामाजिक में सांस्कृतिक गरिमा का गवाह रहा है तो दूसरी ओर राजनीतिक एवं साहित्यिक गतिविधियों का भी केंद्र रहा है इलाहाबाद को संगम नगरी कुंभ नगरी और तीर्थराज भी कहा गया है प्रयाग अध्याय के अनुसार काशी मथुरा अयोध्या इत्यादि सप्तपुरी तीर्थ राज प्रयाग की रानियां है जिनमें काशी को प्रधान पटरानी का दर्जा प्राप्त है 

जानिए इलाहाबाद का नाम प्रयागराज क्यों किया गया

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस नगर का प्राचीन नाम प्रयाग है यह माना जाता है कि चार वेदों की प्राप्ति के पश्चात ब्रह्मा ने यहीं पर यज्ञ किया था इसीलिए सृष्टि के प्रथम यज्ञ स्थल होने के कारण इसे प्रयाग कहा गया का अर्थ है यज्ञ कालांतर में मुगल बादशाह अकबर की धार्मिक और सांस्कृतिक ऐतिहासिकता से काफी प्रभावित हुआ उसने भी इस नगरी को ईश्वर या अल्लाह का स्थान कहा और इसका नाम करण इलाहाबाद कर दिया अर्थात जहां पर अल्लाह का वास हो बाद में अंग्रेजों ने इसका उच्चारण इलाहाबाद कर दिया 


अक्टूबर 2018 में मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज कर दिया है इलाहाबाद का संगम नगरी भी कहा गया है गो मुख से इलाहाबाद तक जहां कहीं भी कोई नदी गंगा से मिलती है प्रयाग कहा गया है प्रयाग रुद्रप्रयाग आदि स्थान पर जहां गंगा यमुना सरस्वती का संगम है उसे प्रयागराज कहा गया है भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में भी इलाहाबाद की एक महत्वपूर्ण भूमिका रही राष्ट्रीय नवजागरण का उदय इलाहाबाद की भूमि पर हुआ तो गांधी युग में प्रेरणा का केंद्र बन गया भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के संगठन में भी इस नगर का योगदान रहा है 


1857 के विद्रोह का नेतृत्व यहां पर लियाकत अली खान ने किया था कांग्रेस पार्टी के तीन अधिवेशन यहां पर 1888 जॉर्ज यूल उमेश चंद्र बनर्जी और की अध्यक्षता में हुए महारानी विक्टोरिया का 1 नवंबर का घोषणा पत्र यहीं पर स्थित पार्क में तत्कालीन वायसराय लॉर्ड कैनिंग द्वारा पढ़ा गया था 


नेहरू परिवार का पैतृक आवास स्वराज भवन आनंद भवन भी यहीं पर स्थित है नेहरू गांधी परिवार से जुड़े होने के कारण इलाहाबाद ने देश को प्रथम प्रधानमंत्री भी दिया उदारवादी समाजवादी नेताओं के साथ-साथ इलाहाबाद क्रांतिकारियों की शरण स्थली रहा चंद्रशेखर आज़ाद ने यहीं पर अल्फ्रेड पार्क में 27 फरवरी 1931 को अंग्रेजों से लोहा लेते हुए ब्रिटिश पुलिस अध्यक्ष नोट बाबर और पुलिस अधिकारी विशेश्वर सिंह को घायल कर गई 


अँग्रेज़ पुलिस वालों को मार गिराया और खुद को गोली मारकर आज़ाद रहने की कसम पूरी की असहयोग आंदोलन आंदोलन इलाहाबाद में ही रखी गई थी संगम तट पर लगने वाले कुंभ मेले के बिना प्रयाग का इतिहास अधूरा है 


प्रत्येक 12 वर्ष में यहां पर महाकुंभ मेले का आयोजन होता है जो कि अपने आप में एक लघु भारत दर्शन करने के समान है इसके अलावा वित्त वर्ष लगने वाले माघ स्नान और कल्पवास का भी आध्यात्मिक महत्व है महाभारत के अनुशासन पर्व के अनुसार माघ मास में तीन करोड़ 10000 तीर्थ प्रयाग में एकत्र होते हैं


इलाहाबाद की धार्मिक ऐतिहासिकता भी रही है भगवान की जन्मस्थली कौशांबी रही है तो भक्ति आंदोलन के प्रमुख स्तम्भ रामानंद का जन्म भी प्रयाग में ही हुआ रामायण काल का चर्चित श्रृंगवेरपुर जहां पर केवट ने राम के चरण धोएं थे यहीं पर है 

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