कोणार्क सूर्य मंदिर -रहस्यों से भरा है

कोणार्क सूर्य मंदिर -रहस्यों से भरा है


कोणार्क सूर्य मंदिर तेरहवीं शताब्दी का सूर्य मंदिर है जो भारत के ओडिशा राज्य के कोणार्क में स्थित है ऐसा माना जाता है कि सूर्य मंदिर का निर्माण पूर्वी गंगा साम्राज्य के महाराजा नरसिंह देव प्रथम ने 12 से 50 ईस्वी में करवाया था यह मंदिर बहुत बड़े रथ के आकार में बना हुआ है जिसमें कीमती धातुओं के पहिए और दीवारों बनी है मंदिर का मुख्य भाग आज विनाश की कगार पर है वर्ष 1984 में इस मंदिर को वर्ल्ड हेरिटेज साइट में भी शामिल किया गया था और साथ ही यह मंदिर भारत के सात आश्चर्य में भी शामिल है 

कोणार्क सूर्य मंदिर -रहस्यों से भरा है
कोणार्क सूर्य मंदिर

भविष्य पुराण और सांबा पुराण के अनुसार उस क्षेत्र में इस मंदिर के अलावा एक और सूर्य मंदिर था जिसे नौवीं शताब्दी या उससे भी पहले देखा गया था इन किताबों में मुंडेरा अर्थात कोणार्क मथुरा और मुल्तान में भी सूर्य मंदिर बताए गए हैं धर्म ग्रंथ के अनुसार कृष्ण के बेटे को कुष्ठ रोग का श्राप था उन्हें ऋषि काटने से बचने के लिए भगवान सूर्य की पूजा करने की सलाह दी तभी सामने चंद्र भागा नदी के तट पर मित्र बन के नज़दीक 12 सालों तक कड़ी तपस्या की दोनों ही वास्तविक कोणार्क मंदिर और मुल्तान मंदिर सांबा की विशेषता दर्शाते हैं. 


मंदिर चंद्र भागा नदी के किनारे पर बनाया गया है लेकिन अब इसकी दिन-ब-दिन कम होती जा रही है यह मंदिर विशेषता सूर्य भगवान के आकार में बनाया गया है सुप्रीत रूप में धातुओं की 12 जोड़ी है जो 3 मीटर चौड़ी है और जिनके सामने कुल सात घोड़े और बाएँ तरफ है इस मंदिर की रचना भी पारंपरिक कलिंगा प्रणाली के अनुसार ही की गई है और इस मंदिर को पूर्व दिशा की ओर बनाया गया है. 


सूर्य की पहली किरण सीधे मंदिर के प्रवेश द्वार पर ही घिरे इस मंदिर का निर्माण किया गया है वास्तविक रूप से एक पवित्र स्थान है जो 229 फीट यानी कि 70 मीटर ऊंचा है कोणार्क मंदिर अपनी मूर्तियों के लिए भी जाना जाता है इस मंदिर के आसपास दो और विशाल मंदिर पाए गए हैं जिसमें देवी मंदिर कोणार्क मंदिर के प्रवेश द्वार के दक्षिण में स्थित है ऐसा माना जाता है कि महादेव मंदिर सूर्य भगवान की पत्नी का मंदिर है. 

मंदिर के पहिए धूप घड़ी का काम करते हैं जिसकी सहायता से हम दिन और रात दोनों में ही सही समय का पता लगा सकते हैं मंदिर के कुछ और रोचक तथ्यों के बारे में जानते हैं प्रकार का निर्माण कार्य कोणार्क मंदिर का निर्माण के आकार में किया गया है जिसमें कुल 24 पहिए पहिए का डायमीटर 10 फीट का है औरतों पर सात घोड़े भी है यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट आश्चर्यचकित प्राचीन निर्माण कला का अद्भुत कोणार्क मंदिर यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट में भी शामिल है. 


यह सम्मान पाने वाला उड़ीसा राज्य का मंदिर है मंदिर में सूर्य भगवान की पूजा की जाती है मंदिर और मंदिर में हुए कीमती धातुओं के उपयोग के लिए जाना जाता है मंदिर के रथ के पहिए का काम करते हैं और सही समय बताते हैं इस मंदिर का मुख्य आकर्षण में 12 पहियों की जोड़ी है यह कोई साधारण नहीं है क्योंकि यह पहिए हमें सही समय बताते हैं.


 कोई भी इंसान पहियों की परछाईं से ही सही समय का अंदाजा लगा सकता है चुंबकीय पत्थर कई कथाओं के अनुसार सूर्य मंदिर के शिखर पर लगा था इसके प्रभाव से कोणार्क के समुद्र से गुजरने वाले जहाज़ इसकी ओर खिंचे चले आते थे जिससे उन्हें भारी क्षति हो जाती थी. 


एक अन्य कथा के अनुसार इस चुंबकीय पत्थर के कारण जहाज़ों के कंपास काम करना बंद कर देते थे इसी कारण अपने जहाज़ों को बचाने के लिए उस समय के नाविक इस पत्थर को निकाल कर ले गए कहा जाता है कि यह चुंबकीय पर एक केंद्रीय शीला का कार्यकर्ता था जिससे मंदिर की दीवारों के सभी पत्थर संतुलन में थे परंतु इस घटना का कोई ऐतिहासिक विवरण नहीं मिलता ना ही ऐसे किसी चुंबकीय पत्थर के अस्तित्व का कोई लिखित द्वारा उपलब्ध है ब्लैक पगोड़ा कोणार्क मंदिर के समुद्र के किनारे बनाया जाना था लेकिन धीरे-धीरे कम होता गया और मंदिर भी समंदर के किनारे से थोड़ा दूर हो गया. 


और बाद में मंदिर के गहरे रंग के कारण इसे काला पगोड़ा कहा जाने लगा नकारात्मक ऊर्जा को कम करने के लिए उड़ीसा में इसका प्रयोग किया जाता है कोणार्क मंदिर का हर टुकड़ा अपने आप में ही विशेष है और लोगों को आकर्षित करता है इसीलिए कोणार्क सूर्य मंदिर भारत के सात आश्चर्य शामिल है.

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